जग्गी वासुदेव जी के जीवन का उद्देश्य लोगों को अपनी आध्यमिकता प्रकट करना है। जग्गी वासुदेव जी का जन्म 3सितंबर 1957 को भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में हुआ था इनके पिता जी का नाम वासुदेव था।
Kahin Behtar Hai Teri Ameeri Se Muflisi Meri,
Chand Sikkon Ki Khaatir Tune Kya Nahi Khoya Hai,
कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,
गरुड़ को देखकर कौवा भी सोचने लगा और कहने लगा अगर गरुड़ ऐसा काम कर सकता है तो मुझको भी एक बार इसे जरूर करना चाहिये फिर क्या गरुड़ की नकल करने के लिए कौव ने तेजी से उड़ान भरी और जितनी ऊपर तक आसमान में जा सकता था उतना ऊपर उड़ता चला गया।