Mushkilein Jaroor Hain Magar Thehra Nahi Hoon Main,
Manzil Se Jara Keh Do Abhi Pahucha Nahi Hoon Main.
मुश्किलें जरुर हैं मगर ठहरा नहीं हूँ मैं,
मंज़िल से जरा कह दो अभी पहुंचा नहीं हूँ मैं।
एक समय की बात है एक जगह चार चोर रहते थे वे लोगों को लूटते थे और जो धन लूटने के बाद मिलता था वो आपस में बराबर-बराबर हिस्से में बाँट लेते थे। चारों चोर एक साथ रहते थे लेकिन सभी एक से बढ़कर स्वार्थी थे, सभी चोर सोचते थे कि किसी दिन ज्यादा धन मिलेगा तो बाकी तीनों को नहीं बताऊँगा और सभी की हत्या करके सारा धन अपने पास रख लूँगा।