Unki Aawaz Sunne Ko Bekaraar Rahte Hain,
Shayad Isi Ko Duniya Mein Pyar Kahte Hain,
उनकी आवाज़ सुनने को बेकरार रहते हैं,
शायद इसी को दुनिया में प्यार कहते हैं,
Phir Na Simtegi Mohabbat Jo Bikhar Jayegi,
Zindgi Zulf Nahi Jo Phir Sanwar Jayegi,
फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,
ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी
जग्गी वासुदेव जी के जीवन का उद्देश्य लोगों को अपनी आध्यमिकता प्रकट करना है। जग्गी वासुदेव जी का जन्म 3सितंबर 1957 को भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में हुआ था इनके पिता जी का नाम वासुदेव था।