Baras Jaye Yahan Bhi Kuch Noor Ki Barishen ,
Ke Emaan Ke Shishon Pe Badi Gard Jami Hai,
बरस जाये यहाँ भी कुछ नूर की बारिशें,
के ईमान के शीशों पे बड़ी गर्द जमी है,
Jalne Do Zamane Ko Chalo Ek Saath Chalte Hain,
Nayi Duniya Basane Ko Chalo Ek Saath Chalte Hain,
जलने दो ज़माने को चलो एक साथ चलते हैं,
नयी दुनिया बसाने को चलो एक साथ चलते हैं,
Khidki Se Jhankta Hu Main, Sabse Najar Bacha Kar,
Bechain Ho Raha Hu, Kyu Ghar Ki Chhat Pe Aakar,
खिड़की से झांकता हूँ मै, सबसे नज़र बचा कर
बेचैन हो रहा हूँ, क्यों घर की छत पे आ कर
राहत इंदौरी ने शायरी, शायरी और ग़ज़ल की दुनिया में बहुत नाम कमाया है। डॉ. राहत इंदोरी उर्दू दुनिया के महान कवियों में से एक थे, इसके अलावा, वे हिंदी दुनिया के प्रमुख गीतकारों में से एक थे, उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके पिता का नाम रफतुल्लाह कुरैशी और माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था। उन्होंने मध्य प्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त थी। आज हम आपके लिए राहत इन्दौरी जी के कुछ प्रमुख शेर लेकर आये हैं, जिनको पढ़कर आपके मन फिर से राहत इन्दौरी की यादें ताजा हो जाएंगी, तो बने रहिए हमारे साथ बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।